Allahabad High Court on Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासन बनाने को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसके अलावा अदालत ने पंचायत चुनाव को टालने को असंवैधानिक बताया।
अदालत ने प्रदेश सरकार से ओबीसी रिपोर्ट के साथ टाइमलाइन मांगी है। हालांकि, कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है जो अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है। सरकार को पंचायत चुनाव को लेकर जल्द से जल्द तस्वीर को साफ कर देना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने सरकार को अंतिम अवसर के रूप में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार ने कोई आयोग गठित किया है तो उसकी जानकारी और अन्य विवरण कोर्ट में दाखिल करें। इसमें चुनाव होने की समय सीमा स्पष्ट रूप से बताई गई हो, प्रस्तुत करें।
उल्लेखनीय है कि, सहारनपुर से याचिकाकर्ता अरविंद राठौर की ओर से दाखिल की गई याचिका पर अदालत ने ये निर्देश दिया। मामले में 13 जुलाई को दोपहर दो बजे अगली सुनवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया है। 25 मई को सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया था। अब याचिका में प्रशासकों को हटाकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग की गई है। जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई हुई।
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12 मई को प्रकाशित हुई मतदाता सूची
जानकारी के लिए बता दें कि, उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव मई में होने थे, लेकिन यूपी में पंचायत चुनाव की मतदाता सूची ही 12 जून को प्रकाशित हो पाई थी। साथ ही पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने को पिछड़ा वर्ग आयोग भी बनाया जाना था। पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के साथ उसे छह महीने का समय दिया गया था, ताकि वो हर जिले में पिछड़ों की सामाजिक आर्थिक स्थिति का आकलन कर सके। अब अदालत ने पंचायत चुनाव को लेकर सरकार से समयसीमा मांगी है।
