नीट पेपर लीक मामला: जांच एजेंसी ने 20,000 पन्नों की चार्जशीट की दाखिल, कोर्ट में CBI की दलीलें

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NEET Paper Leak Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में शुक्रवार को नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई हुई। अदालत में सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट पर दलीलें सुनीं गई। दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने सोमवार को आरोप पत्र पर संज्ञान लेने का फैसला किया। दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 13 आरोपियों के खिलाफ लगभग 20 हजार पृष्ठों का आरोप पत्र दायर किया है।

आरोपियों में मनीषा मंधारे, मनीषा वाघमारे, मनीषा संजय हावलदार, यश यादव, प्रहलाद कुलकर्णी, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, डॉक्टर मनोज शिरुरे, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, हर्षद जयेश शाह, मंगिलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल का नाम शामिल है। विशेष त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश अजय गुप्ता ने वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक और लोक अभियोजक अर्जुन आनंद द्वारा संज्ञान के बिंदु पर दी गई दलीलें सुनीं।

जांच एजेंसी सीबीआई ने बताया कि एक वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत मिलने के बाद 12 मई, 2026 को FIR दर्ज की गई थी। यह मामला तब सामने आया जब व्हिसलब्लोअर शशिकांत सुथार को लीक हुआ प्रश्न पत्र मिला। बताया गया कि लीक हुआ परीक्षा पत्र यश यादव, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे और मनीषा वाघमारे के माध्यम से मंगिलाल बिवाल और विकास बिवाल तक पहुंचा। एजेंसी ने आरोप लगाया कि मनीषा संजय वाघमारे ने तीन विषय विशेषज्ञों, मनीषा मंधारे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा संजय हावलदार से परीक्षा पत्र प्राप्त किया था।

यह भी बताया गया कि उन्हें प्रश्न लेखन, अनुवाद और पुनर्अनुवाद के लिए नियुक्त किया गया था। इसके लिए एनटीए द्वारा अधिकृत किया गया था। सीबीआई ने कहा कि इन तीनों विशेषज्ञों की परीक्षा पत्र तक पहुंच थी। उन्हें मराठी परीक्षा के लिए नियुक्त किया गया था। इन आरोपियों ने या तो पर्ची बनाई या प्रश्नों को याद किया। उन्होंने होटल में बैठकर प्रश्न पत्र छात्रों के साथ साझा किया। एजेंसी ने कहा कि उन्होंने एनटीए के साथ हस्ताक्षरित गोपनीयता समझौते का उल्लंघन किया। मनीषा मंधारे प्राणी विज्ञान और वनस्पति विज्ञान की विषय विशेषज्ञ थीं। पुणे स्थित उनके आवास पर 8 छात्र कोचिंग में भाग लेते थे।

जांच के दौरान मोबाइल फोन और NCERT की पुस्तकों से भी दस्तावेज बरामद किए गए। यह बताया गया कि जांच के दौरान प्राणी विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के प्रश्न विश्लेषण के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के एक विशेषज्ञ को भेजे गए थे। यह पाया गया कि 90 में से 79 प्रश्न साझा किए गए थे। ये प्रश्न कैलाश सेट के थे, जिसे परीक्षा के लिए चुना गया था। परीक्षा में पूछे गए प्रश्न कैलाश सेट से ही थे। कैलाश और शिवालिक: परीक्षा के दो सेट थे।

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गौरतलब है कि, मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी। अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के 3 एनटीए विषय विशेषज्ञ शामिल हैं। लीक हुए प्रश्न पत्रों को जुटाने और वितरित करने वाले कई बिचौलियों की भी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो व्यक्तियों को भी उपरोक्त विशेषज्ञों से लीक हुए प्रश्न पत्र प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

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