Suman Kalyanpur Passes Away: भारतीय संगीत जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। वह अपनी मधुर और मखमली आवाज के लिए दुनियाभर में जानी जाती थी। रविवार शाम मुंबई स्थित अपने आवास पर उन्होंने करीब 8 बजे अंतिम सांस ली। गायिका के निधन की खबर सुनते ही राजनीति, बॉलीवुड और संगीत जगत ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दुख जताया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने गायिका के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “प्रसिद्ध गायिका सुमन कल्याणपुर के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक जगत को समृद्ध बनाया”।
मीडिया रिपोर्ट की माने तो वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रही थीं। पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर को सोमवार को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में अंतिम विदाई दी जाएगीं। 28 जनवरी 1937 में पूर्वी बंगाल (वर्तमान में बांग्लादेश) के शहर ढाका में जन्मीं सुमन ने हिंदी, मराठी, असमिया, गुजराती, कन्नड़, मैथिली, भोजपुरी, राजस्थानी, बंगाली, ओडिया और पंजाबी के अलावा अन्य कई भाषाओं में भी फिल्मों के लिए के लिए गाने रिकॉर्ड किए।
बता दें कि, गायिका ने 11 भाषाओं में 3,000 से ज्यादा फिल्मी-नॉन फिल्मी गाने गाए। वह भारत की सबसे प्रसिद्ध और महान पार्श्व गायिकाओं में से एक मानी जाती हैं। सुमन कल्याणपुर भारतीय संगीत जगत की उन गायिकाओं में से एक थीं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर को अपनी गायकी से यादगार बना दिया। उन्होंने कई सदाबहार गीतों को अपनी आवाज से अमर बनाया और संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास पहचान स्थापित की। उनकी आवाज की मिठास और सुरों की गहराई ने उन्हें भारतीय फिल्म संगीत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल किया।
फिल्म मंगू और साल 1954 में आई फिल्म दरवाज़ा के लिए महान संगीतकार शौकत अली हाशमी के निर्देशन में तकरीबन 5 गाने गाए, साथ ही साथ मोहम्मद रफी के साथ गाए कुछ गाने आज भी आम लोगों की ज़ुबान पर रहते हैं। जिनमें ‘तेरे मेरे प्यार के चर्चे, ना-ना करते प्यार, तुम रूठो ना हसीना, रहे ना रहे हम, परबतें के पेड़ों पर शाम का बसेरा, ये पर्वर्तों के दयारे’ मशहूर थे।
पद्म भूषण से सम्मानित
बता दें कि, सुमन कल्याणपुर को उनके महान योगदान के लिए अनेकों सम्मान से भी नवाज़ा गया। हिंदी फिल्म में शास्त्रीय गीत के लिए तीन बार प्रतिष्ठित "सुर श्रृंगार संसद" पुरस्कार प्राप्त किया और भारत सरकार ने साल 2023 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। अब दिग्गज गायिका का चले जाना संगीत जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है।
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