West Bengal Politics: पश्चिम-बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बिखराव जारी है। एक के बाद एक नेता या तो बगावत पर उतर आएं हैं या फिर पाला बदल रहे हैं। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बगावत जारी है। पार्टी के 80 विधायकों में 50 ज्यादा विधायकों ने दो बागी विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा से होटल में मुलाकात की है। यह दोनों वह विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है।
ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पश्चिम-बंगाल में बड़ा तख्तापलट होने जा रहा है। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पार्टी विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी के कई बड़े नेता पार्टी की हालत के लिए अभिषेक बनर्जी को दोषी ठहरा रहे हैं। वे भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, वरिष्ठ नेताओं को किनारे करने और I-PAC के प्रोफेशनल्स के जरिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगा रहे हैं।
100 पार्षदों ने छोड़ी टीएमसी
गौरतलब है कि, रविवार को बुआ-भतीजा की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। इसके इतर विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 टीएमसी पार्षदों ने पार्टी को अलविदा कह दिया। पार्टी से अलग हुए नेता बीजेपी के साथ संपर्क में हैं और लगातार बातचीत कर रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह सभी पार्षद और नेता बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं।
इसके अलावा अभिषेक बनर्जी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है जिसकी बानगी रविवार को सोनारपुर में देखने को मिली। यहां टीएमसी नेता के ऊपर अंडे और जूते फेंके गए। वहीं, एक और सीनियर नेता कल्याण बनर्जी ने अगले दिन आरोप लगाया कि उनके सिर पर एक पत्थर लगा था। लेकिन इन सबसे ऊपर, जहां भी वे गए, चोर, चोर के नारे लगे। इस तरह का दृश्य हर टीएमसी विधायक और सांसद को बेहद चिंतित कर रहा है।
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तख्तापलट के बन रहे हालात
ऐसे में पार्टी के कई सीनियर नेताओं को डर सता रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ जुड़ाव उनका राजनीतिक करियर बर्बाद कर सकता है। शायद यही वह असली वजह है जो कभी खौफ मानी जाने वाली टीएमसी के पतन को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। पार्टी में पार्षद से लेकर सांसद तक एक के बाद एक नेता या तो अलविदा कह रहा हैं या फिर आलाकमान के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बागी नेता या तो टीएमसी से अलग होकर नई पार्टी बनाएंगे या सत्तारूढ़ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में टीएमसी में बड़ा तख्तापलट हो सकता है।
