अंजनी कुमार
Modi Cabinet Expansion: मोदी कैबिनेट में इस समय बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज है। बृहस्पतिवार सुबह की तमाम चर्चित खबरों के साथ एक ऐसी खबर भी आयी जिसने केंद्र दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। जब केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने ही उन मंत्रियों को यह संकेत स्पष्ट तौर पर दे दिया कि मंत्रिमंडल से कुछ साथियों की विदाई इसीलिए की जा रही है क्योंकि उनका प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहा है। इस बात की संभावना व संकेत राज्यसभा चुनाव के जरिए ही भाजपा ने दे भी दिया था और तभी से मोदी मंत्रिमण्डल के कई मंत्रियों के विभागों में बड़े फेरबदल की बात को बल मिलने लगा।
वहीं, इस बात के कयास कि कुछ की छुट्टी भी हो सकती है जैसी बात चर्चा से निकलकर हकीकत बनती नजर आयी। यानि जैसा काम, वैसा ईनाम। यही वजह है कि केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे बड़े नाम भी इसमें शामिल हो गए हैं। याद रहे कि इस बात की मंशा प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी हाल की की छह देशों की यात्रा से पूर्व स्पष्ट कर दी थी। इस बात की संभावना है कि इस फेरबदल को जल्द ही सिरे चढ़ाया जाएगा।
वहीं, कैबिनेट विस्तार की बात भी कही जा रही है। कुछ दिग्गज मंत्रियों के नाम पर भी कैंची चलने की बात की जा रही है तो कुछ ऐसे अप्रत्याशित नाम भी मंत्रिमंडल में जुड़ सकते हैं जिनकी दूर-दूर तक चर्चा नहीं रही थी। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुई अलग-अलग मुलाकातों के बाद इस कवायद को अंतिम रूप दे दिया गया है।
सूत्रों से निकलकर आ रही एक खबर के मुताबिक, इस बड़े फेरबदल में कुछ बड़े विभागों के मंत्रियों के नाम भी हैं। ऐसे करीबन आधा दर्जन ऐसे मंत्री हैं जिनके बारे में चर्चा यह है कि उन्हें किसी सूरतेहाल में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, केंद्र की एनडीए सरकार के सहयोगी सहित कुल 9 नेताओं को मोदी की नयी टीम में जगह मिल सकती है।
जिन मंत्रियों पर दुधारी तलवार चलाये जाने की प्रबल संभावना है उनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम पहले पहल लिया जा रहा है। हाल ही में देशभर में हुए नीट पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान पर भारी राजनीतिक दबाब है। इसकी आंच प्रधानमंत्री मोदी सहित पूरी पार्टी तक आ पहुंची है। और यह उनकी कुर्सी तक भी जा पहुंची है। इससे पूर्व यूजीसी व एनसीआरटी विवाद को लेकर वह विपक्ष के निशाने पर हैं।
वहीं, दूसरा नाम केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पूरी का आता है जिनके बारे में कहा यह जा रहा है कि उन्हें कैबिनेट से हटाकर संगठन या फिर किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा, जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं हो रहा है या फिर जिन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव वहां के चुनावी समीकरण को दुरुस्त करने के लिए कुछ राज्यस्तरीय मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है।
वहीं, राज्यसभा के चुनाव के मार्फ़त भाजपा ने इस बात के संकेत दे दिया कि एक नहीं, दो नहीं बल्कि कई मंत्रियों की विदाई हो सकती है। उनमें केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। वहीं, अल्पसंखयक मंत्रालय के राज्य मंत्री जार्ज कुरियन का नाम भी शामिल है जिन्होंने पहले ही मोदी मंत्रिमंडल को अलविदा बोल दिया है।
मंत्रिमंडल में नए चेहरे, पर जिनकी सरप्राईज एंट्री की बात कही जा रही है उनमें शक्तिकान्त दास (पूर्व गवर्नर आरबीआई) का सबसे अहले नंबर पर है जो कि प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव भी रहे और जिनके बारे में चर्चा यह है कि कैबिनेट में उनकी एंट्री कराकर उन्हें कोई महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो सौंपा जा सकता हैं।
श्री कान्त शिंदे: वहीं, दूसरा नाम श्री कान्त शिंदे का आता है जो कि शिव सेना सांसद भी हैं। अपनी हाल की दोस्ती को निभाते हुए व महाराष्ट्र में महायुती गठबंधन को मजबूत करने व शिव सेना के शिंदे गुट को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने के लिए अब तक सांसद रहे शशिकांत शिंदे को मंत्री बनाकर इस दोस्ती को परवान चढ़ाया जा सकता है।
कभी रामायण धारावाहिक के जरिये घर-घर में पहचान बनाने वाले मेरठ के नव निर्वाचित सांसद अरुण गोविल के बारे में चर्चा है कि उन्हें भी मोदी टीम की विस्तार योजना के तहत जगह मिल सकती है। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि ऐसे करीबन 9 चेहरे हैं जिन्हें नयी काबीना विस्तार में जगह मिल सकती है।
शानदार काम करने वालों को मिलेगा प्रमोशन
भाजपा के वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर को आगामी फेरबदल में कोई बड़ी व महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भूमिका दी जा सकती है वहीं, बेहतर कार्य करने वाले कुछ राज्य स्तरीय मंत्रियों को प्रोमोट कर उन्हें स्वतंत्र प्रभार या फिर सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धर्मेंद्र प्रधान की जगह शिक्षा मंत्रालय जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
चुनाव व क्षेत्रीय समीकरणों पर फोकस
मोदी मंत्रिमंडल में इस पूरे फेरबदल के पीछे कुछ राज्यों के विधान सभा चुनाव व भविष्य की राजनीतिक बिसात (2029) के लोकसभा चुनाव को मुख्य वजह माना जा रहा है, यही वजह है कि भाजपा जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए इस बार ओडिशा, महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेशों को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में तवज्जो मिलने के पूरे-पूरे आसार हैं।
