Lucknow:लखनऊ के 5 स्टार होटल में युवा साइंटिस्ट की संदिग्ध मौत, बैटरी से चलने वाले अनोखे ट्रैक्‍टर का किया था आविष्कार

image
Rahul singh

Lucknow:उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक होटल में एक युवा वैज्ञानिक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि चेक-आउट का समय बीतने के बाद भी कमरे से कोई बाहर नहीं निकला। इसके बाद होटल कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे का दरवाजा खुलवाया तो वैज्ञानिक का शव बेड पर पड़ा मिला। सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी।

दरअसल यह पूरा मामला लखनऊ के विभूतिखंड स्थित नोवोटेल होटल का है। जहां महराजगंज निवासी 22 वर्षीय युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे होटल में ठहरे थे। लेकिन अगले दिन चेक-आउट का समय बीतने के बाद भी जब वह अपने कमरे से बाहर नहीं आए, तो होटल कर्मचारियों ने कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक कोई जवाब न मिलने पर होटल प्रबंधन को संदेह हुआ और उन्होंने  इसकी सूचना विभूतिखंड पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और होटल कर्मचारियों की मदद से कमरे का दरवाजा खुलवाया।

पुलिस के मुताबिक, राहुल सिंह होटल के कमरे में बेड पर अचेत अवस्था में पड़े मिले। कमरे में उनका सामान और खाने-पीने की कुछ चीजें व्यवस्थित रखी थीं। होटल कर्मचारियों की सूचना पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। राहुल के पास मिले दस्तावेजों और मोबाइल फोन के आधार पर पुलिस ने उनके परिजनों को घटना की जानकारी दी। एसीपी विभूतिखंड सौम्या पांडे ने बताया कि कमरे में किसी प्रकार के संघर्ष या संदिग्ध वस्तु के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, बेड के पास उल्टी के निशान पाए गए हैं।

प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस हार्ट अटैक की आशंका जता रही है, लेकिन मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।

आपको बता दें कि लखनऊ के होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले युवा साइंटिस्ट राहुल सिंह अपने इनोवेशन और वैज्ञानिक प्रतिभा के लिए जाने जाते थे। गोरखपुर के एबीसी पब्लिक स्कूल, दिव्यनगर में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली थी। कक्षा 12वीं की पढ़ाई के दौरान बैटरी से चलने वाला ट्रैक्टर तैयार किया था, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वह मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डिजाइन इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर में इनोवेटर के रूप में रिसर्च और उच्च शिक्षा से जुड़े हुए थे।

Read Also:MP News: बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगा UCC, सीएम मोहन यादव ने लोगों से मांगे सुझाव

इसके अलावा महज 13 साल की उम्र से उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में प्रथम स्थान हासिल करने में सफल रहे। साल 2018 में उन्होंने रोटी मेकर, 2019 में बैटरी से चलने वाली इको-फ्रेंडली साइकिल  बनाकर पहला स्थान हासिल किया साथ ही 2020 में कोरोना काल के दौरान आयोजित ऑनलाइन साइंस फेस्टिवल में बैटरी चालित ट्रैक्टर बनाकर अपनी एक अलग पहचान स्थापित की

राहुल द्वारा बनाए ट्रैक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह थी। कि उसकी बैटरी को बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। इसके अलावा उन्होंने कई छोटे ड्रोन भी विकसित किए थे। कम उम्र में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें एक उभरते हुए युवा वैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया था। उनकी असामयिक मौत ने परिवार, शिक्षकों और विज्ञान जगत को गहरा सदमा पहुंचाया है।

Read Also:गाजियाबाद सूर्या हत्याकांड: मुख्य आरोपी असद के घर चस्पा बुलडोजर एक्शन का नोटिस, प्रशासन ने ढोल नगाड़ों के साथ कराई मुनादी