UP Monsoon Update: उत्तर प्रदेश में बुधवार से मानसून का तांडव जारी है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश में मानसूनी बादलों ने अपना उग्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। बुधवार देर रात से ही प्रदेश में भारी बारिश जारी है। गुरुवार सुबह से राज्य के हालात और बिगड़ने लगे हैं। दिल्ली के आसपास पड़ने वालों जिलों में ज्यादा बारिश हो रही है। नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर और मथुरा समेत 50 से ज्यादा शहरों में मूसलाधार बारिश हो रही है। भारतीय मौसम विभाग ने 27 जिलों में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।
आसमान से बरस रही इस आफत के कारण कहीं सड़कें समंदर बन चुकी हैं, तो कहीं जमींदोज हो रही है। मौसम विभाग ने स्थिति की भयावहता को देखते हुए इतिहास में इस सीजन में पहली बार राज्य के सभी 75 जिलों में एक साथ चेतावनी जारी की है, जिसमें से 27 जिलों को 'रेड अलर्ट' पर रखा गया है।
बीते 24 घंटों में बारिश और उससे जुड़े हादसों से अब तक चार लोगों की मौत भी हो गई। मूसलाधार बारिश ने दिल्ली से सटे हाईटेक सिटी शहर नोएडा और गाजियाबाद की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया। नोएडा के पॉश इलाकों से लेकर मुख्य मार्गों तक पर एक से दो फीट तक पानी जमा हो गया है, जिससे वाहन सड़कों पर रेंगते हुए नजर आ रहे हैं। गाजियाबाद की बात करें तो यहां से एक बेहद खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जहां भारी जलभराव के कारण अचानक करीब 10 फीट गहरी सड़क धंस गई और एक कार देखते ही देखते उस गहरे गड्ढे में समा गई।
इसके इतर प्रदेश के अन्य हिस्सों से मौत की दुखद खबरें भी सामने आई हैं। बारिश के इस शुरुआती दौर में पिछले 24 घंटे के भीतर अलग-अलग हादसों में चार लोगों की मौत हो गई। अलीगढ़ और प्रयागराज में जलभराव के बीच बिजली का तार टूटने से पानी में करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से अलीगढ़ में एक महिला और प्रयागराज में दो लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
जारी रहेगा बरसात का सिलसिला
दूसरी ओर, हापुड़ जिले में लगातार सीलन और बारिश के दबाव के कारण एक पुराना मकान भरभराकर ढह गया, जिसके मलबे के नीचे दबने से एक महिला ने दम तोड़ दिया। मकान गिरने का कारण दो दिनों से हो रही लगातार बारिश है। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय प्रदेश में मानसून अत्यंत आक्रामक हो गया है। बारिश का यह उग्र सिलसिला आगामी पांच दिनों तक बिना रुके लगातार जारी रहेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस भारी बारिश से प्रदेश में अब तक चल रही 40 प्रतिशत कम बारिश के कोटे की भरपाई हो सकेगी, लेकिन फिलहाल बाढ़ और जलभराव का खतरा चरम पर है।
