Delhi: हिन्दी पत्रकारिता दिवस से पहले IIMC का बड़ा फैसला, कहा- देवनागरी और हिन्दी में उर्दू लेखन मंजूर नहीं

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Indian Institute of Mass Communication

शनिवार 30 मई 2026 को हिन्दी पत्रकारिता के स्वर्णिम 200 साल पूरे होने जा रहे हैं। हिन्दी दिवस के इस गौरवशाली दिवस से एक दिन पहले पत्रकारिता के सबसे बड़े संस्थान भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) ने उर्दू पत्रकारिता को लेकर बड़ा फैसला लिया है। संस्थान का कहना है कि अब हिंदी और देवनागरी में उर्दू पढ़ने-लिखने की रवायत मंजूर नहीं होगी। हम नहीं मानते हैं कि देवनागरी में उर्दू लिखी जा सकती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल जवाबी हलफमाने में आईआईएमसी ने साफ लिखा है कि वह देवनागरी लिपि में उर्दू लिखने को मंजूरी नहीं दे सकते, और नहीं इस संदर्भ में उसे किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए राम मनोहर लोहिया या महात्मा गांधी या किसी अन्य ऐतिहासिक परंपरा की कोई दरकार है। हलफमाने के अनुसार, हिंदुस्तानी भाषा के संदर्भ में महात्मा गांधी के विचार उर्दू पत्रकारिता में दाखिले के संदर्भ में हमारे अकादमिक फैसले से ऊपर नहीं हैं, इससे हमारा फैसला खारिज नहीं हो सकता।

बता दें कि, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन में उर्दू पत्रकारिता कोर्स की प्रवेश परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। परीक्षा की लिपि को लेकर उठे इस मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने संस्थान को नोटिस जारी किया था और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था। इस पूरे विवाद ने हिंदी और उर्दू भाषा को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

दरअसल, याचिका दायर करने वाले छात्रों का आरोप है कि उर्दू पत्रकारिता कोर्स की प्रवेश परीक्षा में लिपि को लेकर जो बदलाव किए गए हैं या जो नियम तय किए गए हैं, वो उर्दू भाषा के छात्रों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। उनका कहना है कि उर्दू पत्रकारिता जैसे कोर्स में भाषा और उसकी मूल लिपि का सम्मान होना चाहिए। छात्रों का यह भी मानना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं होगी, तो इससे कई अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।

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जानिए पूरा विवाद

छात्रों के वकील ने बताया कि ये मामला कुछ छात्रों से जुड़ा हुआ है जिन्होंने आईआईएमएसी में उर्दू पत्रकारिता में एडमिशन के लिए फॉर्म भरा था। आईआईएमसी में पहले 27 अप्रैल को एक सूचना जारी की थी जिसके तहत उर्दू पत्रकारिता के पीजी डिप्लोमा में एडमिशन लेने के लिए उर्दू और देवनागरी दोनों में परीक्षा दे सकते थे लेकिन 6 मई को एक नया नोटिफिकेशन जारी हुआ, जो कहता है कि परीक्षा सिर्फ उर्दू में कराई जाएगी, हिंदी का यहां पर कोई जिक्र नहीं। कई बच्चे ने फीस पेमेंट भी कर दी है, जो देवनागरी भाषा में परीक्षा देना चाहते थे, अब उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।

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