अंजनी कुमार
जयपुर के राजीव नगर आवास परियोजना का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कारण गरीबों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से वर्षों पहले बनाए गए हजारों मकान आज भी खाली पड़े हैं। राजनीतिक बदलाव, अधूरी मूलभूत सुविधाएं, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह परियोजना अपने उद्देश्य और मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। नतीजन, गरीबों के लिए बनाए गए हजारों मकान आज भी खाली पड़े हैं।
सत्ता परिवर्तन, अधूरी मूलभूत सुविधाएं, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह परियोजना अपने उद्देश्य तक ही नहीं पहुंच सकी। तत्कालीन गहलोत सरकार ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 100 बीघा जैसे विशाल भू-भाग में 300 करोड़ रुपए की लागत से 2008 से 2013 के बीच इस राजीव नगर को धरातल पर खड़ा किया था। वहां परियोजना के तहत मकान तो बनाए गए पर वे घटिया बने जिसे किसी ने इसे लिया ही नहीं और उनके शासन में हुए व्यापक भ्रष्टाचार के चलते तत्कालीन कांग्रेस सरकार सत्ता से बेदखल भी हो गयी।
दूसरी बार तत्कालीन गहलोत सरकार सत्ता में लौटी तो राजीव नगर भूतिया बस्ती में तब्दील हो चुका था। अब यहां नशेड़ियों और अपराधी राज कर रहें हैं और सुबह -शाम यहां अड्डा जमाये रहते हैं। वैसे जयपुर के बेहद खूबसूरत इलाके किशनबाग में यह बसा है। इसी वजह से 2009 में जयपुर की झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए करीब 100 बीघा में 300 करोड़ रुपए खर्च कर तीन जगहों पर चार हजार मकान राजीव गांधी नगर योजना के तहत बनाए गए थे।
साल 2013 में सभी मकानों की लॉटरी निकली, लेकिन आवंटन से पहले ही गहलोत सरकार सत्ता से चली गई। प्रदेश में बीजेपी सरकार आई तो उसने योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पानी, बिजली और सड़क की व्यवस्था भी नहीं हो पाई उधर चोर खिड़कियां, दरवाजे और सरिया तक उखाड़ ले गए। याद रहे कि योजना में 30 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही थी। साल 2014 में केंद्र में सरकार बदलते ही केंद्र सरकार ने भी यह योजना बंद कर दी।
ज्यादातर मकान मुस्लिम समुदाय के लोगों को आवंटित हुए थे। गहलोत सरकार 2018 में वापस लौटी तो मकान रहने लायक नहीं बचे थे। निर्माण इतना घटिया था कि मकान ढहने लगे थे। लिहाजा, जिन लोगों को सवा दो लाख रुपए में आवंटन होना था, उन्होंने इन्हें लेने से मना कर दिया। आज इन सूने पड़े मकानों में पुराने कपड़ों के बदले बर्तन बेचने वाले गुजरात से आए कुछ परिवार अवैध रूप से रह रहे हैं जिनका कहना है कि स्थानीय विधायक ने कहा था कि जाकर वहां रह लो, लेकिन न पानी है और न बिजली। इन परिवारों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
उनका कहना है कि दिनभर अफीम और ड्रग्स लेने वालों का वहां मजमा लगा रहता है। उनका कहना है कि इस वजह से डर भी लगता है, लेकिन उनका कहना है कि वे यहां रह रहे हैं। उन्हें किराया नहीं देना पड़ता। स्थानीय विधायक बालमुकुंदाचार्य का कहना है कि उन्होंने किसी को भी यहां रहने के लिए नहीं कहा, बल्कि यह कांग्रेस सरकार द्वारा एक वर्ग विशेष को खुश करने करने के लिए बनाई गयी योजना थी।
वहीं, कांग्रेस विधायक रफीक खान का कहना है कि बीजेपी ने जानबूझकर गरीबों की इस योजना को असफल कर दिया। एक मोटे आंकड़े के तहत जयपुर में ऐसे चार हजार मकान बनाए गए थे, जिनमें से तीन हजार खाली पड़े हैं और अब वे खंडहरों का रूप ले चुके हैं। विधायक का कहना है कि वर्त्तमान सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया है क्योंकि उनके अनुसार इतने मकानों को तोड़ने और नए सिरे से मरम्मत करने में फिर से सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होंगे।
शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि इन मकानों को ठीक करने में भारी धनराशि की जरूरत होगी, जिसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मगर बड़ा सवाल यह है कि गरीब आज भी झुग्गियों में रह रहे हैं, जबकि उनके नाम पर हजारों करोड़ रुपये की सरकारी जमीन और सैकड़ों करोड़ रुपये जनता का पैसा बर्बाद हो चुका है। हालांकि, एक बेहतर प्रयास के तहत प्रदेश सरकार ने तय किया है कि इन इलाकों में अपराधियों का जमावड़ा न हो, इसके लिए स्थानीय पुलिस चौकी खोली जाएगी।
