राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: अयोध्या के श्रीरामलला मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक के बाद एक नया मोड सामने आता जा रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान कहा था कि एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, जांच में पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा। शनिवार को इस मामले में एक और नया मोड आया, जहां दान करने वाले श्रद्धालु से टिन्नू यादव ने कहा कि ‘चांदी गला दी है उसे भूल जाओ’। जिसके बाद इस पूरे मामले में परत खुलने के बजाय और उलझती नजर आर रही है।
उल्लेखनीय है कि, टिन्नू यादव श्रीराम मंदिर ट्रस्ट तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर है। टिन्नू के इस बयान के बाद रामभक्तों का दुख कम नहीं हो रहा है। टिन्नू पर राम मंदिर की संपत्तियों में हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिस व्यक्ति ने राम मंदिर में चांदी की चरण पादुका और हार दान किया था, उससे टिन्नू यादव ने कहा था कि ‘चांदी गला दी गई है, उसे भूल जाओ’।
जौनपुर के रहने वाले व्यापारी अनिल विश्वकर्मा ने राम मंदिर में हार और चरण पादुका को भगवान को समर्पित किया था। विश्वकर्मा मुंबई में एक बड़ा कारोबार चलाते हैं। उन्होंने रामलला के लिए चांदी के चरण पादुका और हार टिन्नू यादव को सौंपा था, लेकिन मंदिर की ओर से उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई थी। जब कभी अनिल विश्वकर्मा के परिवार ने चरण पादुका और हार की रसीद मांगी तो टिन्नू ने उनकी बात को टाल दिया और कई बहाने बनाए।
इसके बावजूद जब उन्होंने ज्यादा दबाव बनाया तो उसने कहा था कि पहले बैंक के अधिकारी हार की शुद्धता की जांच करेंगे फिर इसे प्रभु को पहनाया जाएगा। इसके बाद आपको फोटो और वीडियो दे दी जाएगी। वहीं, रसीद के मामले पर उन्होंने कहा एक बार भाई साहब (ट्रस्ट महासचिव चंपत राय) देख लें फिर रसीद मिल जाएगी।
मंदिर निर्माण कार्य में हेराफेरी के आरोप
इसके अलावा मंदिर निर्माण से जुड़े पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने अनिल मिश्रा पर हर काम में कमीशन लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मंदिर के चढ़ावे की चोरी तो अब शुरू हुई है। इससे पहले मंदिर निर्माण के दौरान जमकर पैसों की हेराफेरी और कमीशनखोरी हुई थी। उन्होंने यह दावा भी किया कि मंदिर के वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी मिलने के बाद अनिल मिश्रा ने हर काम में 40 फीसदी कमीशन लेना शुरू कर दिया था। मंदिर निर्माण कार्य में राम के नाम पर जमकर पैसों की लूट हुई थी। इस पूरे मामले को लेकर गठित एसआईटी ने कई लोगों से पूछताछ और लगातार गहन जांच में जुटी है। मुख्यमंत्री के सख्त आदेश के बाद इस जांच में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को दूर रखा गया है।
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