Allahabad High Court: अमरोहा के निकाह, तीन तलाक और हलाला से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा सख्त टिप्पणी की है कि देश का आपराधिक कानून किसी व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) या धार्मिक प्रथा के अधीन नहीं हो सकता। अदालत ने दो टूक कहा कि अगर किसी के खिलाफ आपराधिक गंभीर आरोप लगे हैं तो उसे पर्सनल लॉ का हवाला देकर एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने यह टिप्पणी की है।
यह मामला अमरोहा के सैदनागली थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता ने कम उम्र में निकाह, तीन तलाक और हलाला के बाद फिर निकाह के नाम पर लगातार यौन शोषण के आरो लगाए हैं। आरोपियों ने मामले को रद्द करने के लिए पर्सनल लॉ का हवाला देकर याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट नेकहा कि अब तक मामले में जो तथ्य सामने आए है वह बेहद गंभीर और चिंताजनक है। प्रथम दृष्यता सभी आरोपियों की भूमिका इसमें कानून के खिलाफ है, इसलिए मामला रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और जांच जारी रहेगी।
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का कम उम्र में निकाह यानी उसका बलात्कार किया गया और बाद में हलाला के नाम पर उसके साथ गैंगरेप हुआ। यह सभी परिस्थितियां हमारे समाज के हिस्से की एक तस्वीर पेश करती हैं जो संवैधानिक मूल्यों, महिला सशक्तिकरण, निजता, अस्मिता, समानता और व्यक्तिगत गरिमा के अलावा संविधान के अनुच्छेद 21 और 14 के उद्देश्यों से बहुत दूर है। इस मामले की संगीनता को देखते हुए अदालत ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया।
यह रहा पूरा मामला
यह मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के थाना सैदनगली का है। जहां पर पीड़िता का निकाह 25 अप्रैल 2015 को जबरन अजहर नवाज के साथ कराया गया था, तब उसकी उम्र महज 15 साल की थी। जनवरी 2016 में पति ने उसे 'तीन तलाक' दे दिया। इसके बाद दोबारा शादी करने के बहाने नवंबर 2016 में पीड़िता को मौलाना की सलाह का झांसा देकर जबरन 'निकाह हलाला' की प्रक्रिया से गुजरने पर मजबूर किया गया। मौलाना कय्यूम ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए, जिसके बाद 2017 में उसका अजहर से दोबारा निकाह हुआ। इस मामले में पीड़िता ने आपराधिक मामला दर्ज कराया।
इस मामले में बीएनएस की धारा 85, 115(2), 64, 351(2), 61(2)(a), 70(2), मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 3/4 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(l)/6 और 17/18 में सैदनगली थाने में एफआईआर दर्ज हुई। विवाद यहीं नहीं थमा इसके बाद साल 2021 में अजहर ने उसे दूसरी बार तीन तलाक दे दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली। तलाक के बाद जब दूसरी महिला से कोई संतान नहीं हुई तो उसने बेटी का हवाला देकर पीड़िता को तीसरी बार साथ रहने का झांसा दिया। जिसके बाद मामला बढ़ता चला गया।
