Maruti Suzuki Flex Fuel Car Launch: देश में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके विकल्प तलाशने की दिशा में मारुति सुजुकी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर का फ्लेक्स-फ्यूल (FFV) वर्जन पेश किया है। दिल्ली में आयोजित एक इवेंट में केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसे लॉन्च किया। कंपनी ने दावा किया कि यह भारत की पहली ऐसी पैसेंजर कार है, जो E20 से लेकर E85 तक किसी भी इथेनॉल वाले ईंधन पर चल सकती है। यानी अब कार मालिकों को ईंधन के ज्यादा विकल्प मिलेंगे और प्रदूषण भी कम होगा।
यह दिखने में नई फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर मौजूदा मॉडल जैसी ही है, लेकिन इसके इंजन में कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं ताकि यह अधिक मात्रा में इथेनॉल वाले ईंधन पर भी आसानी से चल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक 100 फीसदी इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियों का रास्ता भी आसान बना सकती है।
क्या बोले केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी
लॉन्चिग कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के इस्तेमाल से देश में वायु प्रदूषण कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़क से हटाने के लिए वाहन स्क्रैपेज नीति को मजबूत बना रही है। नितिन गडकरी ने ऑटो कंपनियों से पुरानी गाड़ियों को भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक में बदलने के विकल्प विकसित करने की अपील की। उनका कहना था कि यदि पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों को भी इस तकनीक के अनुरूप बनाया जा सके, तो करोड़ों वाहनों से होने वाले प्रदूषण में बड़ी कमी लाई जा सकती है।
मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी पार्थो बनर्जी ने बताया कि पिछले बीते सालों में देश में बिके कुल ग्रीन वाहनों में लगभग 50 फीसदी हिस्सेदारी अकेले मारुति सुजुकी की रही है। इससे साफ है कि ग्राहक अब पर्यावरण-अनुकूल वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। गडकरी ने भविष्य के ईंधन को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत आइसोब्यूटानॉल मिलाने की संभावना पर काम कर रही है, जिससे डीजल पर निर्भरता कम हो सके। इसके अलावा, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए का फंड तय किया है। यह ईंधन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेगा। सरकार और ऑटो कंपनियों की यह पहल भारत को स्वच्छ, सस्ता और आत्मनिर्भर ईंधन की दिशा में आगे बढ़ाने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
