Punjab Election: गुटबाजी और अंदरूनी कलह से कांग्रेस की वापसी मुश्किल, पूर्व सीएम की बगावत पड़ सकती है भारी

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अंजनी कुमार

Punjab Congress Crisis: पंजाब देश का एक ऐसा राज्य है जिसे राजनीति के लिहाज से तो हमेशा बेहद अहम माना जाता है और खासकर विपक्ष कांग्रेस के लिए जो वर्षों से प्रदेश की सत्ता से बाहर है लेकिन आज यही पंजाब पार्टी के लिए एक ऐसी जंग का मैदान बन चुका है, क्योंकि जहां टिकट बंटवारे को लेकर जहां गहरा असंतोष है। वहीं, गुटबाजी के चलते मामला गरम भी है। इससे सवाल यह पैदा होता है कि क्या पार्टी वाकई 2027 में होने वाले प्रदेश के चुनाव में वापसी कर पाएगी? या फिर अंदरूनी कलह एक बार फिर पार्टी की सत्ता में वापसी के सपनों को तोड़ देगी।

हालात ऐसे हैं कि ऊपर-ऊपर तो सब कुछ शांत लग रहा है लेकिन अंदर का माहौल बताता है कि सब कुछ ठीक भी नहीं। ऐसे में लगता है कि वह सत्ता में वापसी के मुंगेरी लाल जैसे सपने को ही देख रही है। क्योंकि पार्टी के अंदरखाने में जिस तरह असंतोष व कलह की स्थिति है वह निश्चित तौर पर उसके मंसूबों पर पानी फिर सकता है।

प्रदेश कांग्रेस में जारी कलह को शांत करने औकर पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच फिलहाल के लिए कुछ हद तक समझौता कराने में फिलहाल सफलता मिली है। पार्टी के अंदर गुटबाजी की दरार काफी गहरी हैं। पार्टी के अंदर गुटबाजी, अंतरकलह और असंतोष की तिकड़ी में फंसती जा रही पार्टी को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी जो कि मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जाते हैं और जो कि बहरहाल लोकसभा में सांसद भी की बगावत कहीं अधिक भारी पड़ सकती है और पार्टी को नुक्सान पहुंचा सकती है।

इसी बात को भांपकर पार्टी आलाकमान ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए जिन भिन्न -भिन्न समितियों की घोषणा की है उसमें चन्नी को पार्टी चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन बना दिया गया जबकि चन्नी पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष का पद पाना चाहते थे। पर अमरिंदर सिंह के उस पद पर बरकरार रखने के फैसले से वह नाराज हैं और अपनी नाराजगी जताने और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के तहत उन्होंने अपने आवास पर समर्थक विधायकों, सांसदों और अन्य नेताओं की एक गुप्त बैठक भी बुलाई है, जिसे पार्टी आलाकमान  के लिए चुनौती के रूप में ही देखा जा रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए अहम बात होगी कि वह अपनी अंदरूनी लड़ाई को कैसे नियंत्रित करे। वैसे  इतिहास गवाह है कि जब भी कांग्रेस में पंजाब के भीतर गुटबाजी बढ़ी है और पार्टी को उस वजह से चुनावी नुकसान उठाना पड़ा है।

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आज स्थिति यह है एक तरफ नेता पद और शक्ति को लेकर असंतुष्ट हैं दूसरी तरफ संगठन में एकता की कमी है और तीसरी तरफ जनता के बीच स्पष्ट संदेश नहीं जा रहा है। ऐसे में  क्या पंजाब जिसे पार्टी का कभी मजबूत गढ़ माना जाता था  वहां , साल  वहां पार्टी 2027 में वापसी कर पाएगी? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब अभी भी कांग्रेस के लिए एक “ओपन फील्ड” है, लेकिन केवल तभी जब पार्टी अपनी अंदरूनी लड़ाई खत्म करे। लेकिन अगर गुटबाजी ऐसे ही चलती रही, तो इसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिलेगा। कुल मिलाकर  पंजाब कांग्रेस आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां फैसले सिर्फ नेताओं के भविष्य का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा का भी निर्धारण करेंगे।

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