pardeep rawat passed away: भारतीय सिनेमा से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी दमदार अदाकारी और खलनायक के यादगार किरदारों से करोड़ों दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ने वाले दिग्गज अभिनेता प्रदीप रावत का निधन हो गया है। 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदीप रावत काफी लंबे समय से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे, और इलाज के दौरान 4 अगस्त की शाम को उनका निधन हो गया। अभिनेता प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके चाहने वालों के बीच शोक का माहौल है। उनके करीबी सहयोगियों और साथ काम कर चुके कलाकारों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
अभिनेता यशपाल शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रदीप रावत को याद करते हुए उनके निधन पर दुख व्यक्त किया। वहीं, अभिनेता के मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने भी सोशल मीडिया पर उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रदीप रावत पिछले कुछ समय से अस्पताल में भर्ती थे और कुछ घंटे पहले उन्होंने अंतिम सांस ली।
आपको बता दें कि अंतिम दर्शन के लिए प्रदीप रावत का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक गोरेगांव वेस्ट स्थित उनके आवास, विंग पी-3, इंपीरियल हाइट्स में रखा जाएगा। जहां परिवार, मित्र और प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए जोगेश्वरी वेस्ट स्थित ओशिवारा श्मशान भूमि ले जाया जाएगा।
'महाभारत' से लेकर 'गजनी' तक, ऐसा रहा प्रदीप रावत का अभिनय सफर
21 जनवरी 1952 को जन्मे प्रदीप रावत भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने अपने दमदार व्यक्तित्व और प्रभावशाली अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई। हिंदी फिल्मों के अलावा उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया। खास बात यह रही कि खलनायक और दमदार चरित्र भूमिकाओं में उनकी मौजूदगी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ती थी।
एक्टर प्रदीप रावत को टीवी दर्शकों के बीच सबसे पहले बी.आर. चोपड़ा के चर्चित धारावाहिक 'महाभारत' से पहचान मिली। इस सीरियल में उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया, जिसे आज भी दर्शक याद करते हैं। अभिनय की दुनिया में शुरुआती दौर उनके लिए आसान नहीं था। मध्य प्रदेश के जबलपुर से आने वाले प्रदीप ने करियर की शुरुआत में काफी संघर्ष किया। कुछ फिल्मों में मुख्य अभिनेता बनने का मौका मिला, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने चरित्र और नकारात्मक भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।
फिल्मी करियर में उन्होंने 'अग्निपथ', 'कोयला', 'मेजर साब', 'सरफरोश', 'बागी' और 'ऐतबार' जैसी कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान आमिर खान की सुपरहिट फिल्म 'लगान' से मिली, जिसमें उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म लगान में देवा का रोल पहले मुकेश ऋषि को मिला था। जोकि उस समय के सबसे मशहूर विलेन माने जाते थे, लेकिन ये किरदार वो अपने बिजी शेड्यूल के चलते नहीं कर पाए और यह किरदार प्रदीप रावत को मिला। उन्होंने अपने अभिनय से इसे यादगार बना दिया।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी प्रदीप रावत का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने तेलुगू फिल्म 'स्ये' से इंडस्ट्री में कदम रखा और बाद में तमिल ब्लॉकबस्टर 'गजनी' (2005) में दमदार अभिनय किया। इस फिल्म में उनके डबल रोल की काफी चर्चा हुई। जब 'गजनी' का हिंदी रीमेक बना, तब भी उन्होंने अपने किरदार को दोबारा निभाया और दर्शकों की सराहना हासिल की।
इसके अलावा उन्होंने कन्नड़ फिल्म 'परोडी', मलयालम फिल्म 'चाइना टाउन', बंगाली फिल्म 'हीरो 420' और भोजपुरी फिल्म 'क्रैक फाइटर' में भी अभिनय किया। अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस और बहुमुखी अभिनय के कारण प्रदीप रावत भारतीय सिनेमा के एक सम्मानित कलाकार के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।
